Tuesday, 17 August 2021

What Are Your Contributions?

  We all have got the same life. And we all want to see only the good part of life. But what about the bad part? 
   Perfection is the sum of both right and wrong. So without worrying we should face the wrongs in life. What others do is not in our control but what matters is what I can contribute. If we are getting some students and we are guiding them then that is also a great contribution towards nation. Even if we are generously giving a smile to someone, it is also the best contribution to make someone happy. Being sympathetic to someone's grief by increasing self-compassion can also be a good contribution. Or raising one's courage is not less than any contribution. If your generosity is eternal, then people's attitude towards you will be higher than that of a harsh person.
  Don't make false promises. Making false promises makes you a bad version of yourself. It's easier to trust you if you're always fulfilling your commitments. And that makes you something good in itself. There can be no better religion than humanity. And as human beings we have to give our best. We should support everyone with the spirit of full cooperation.
     Let's make a promise today that you will not be jealous of anyone, will not harm anyone and will always think of something creative. This would also be a good collaboration.
             
                            Written By- Uttam Kumar

Wednesday, 11 August 2021

If You Can..

    If you can laugh you will have many reasons to laugh. There is no measure of happiness that today, just a little work is done with happiness. The attainment may be small or big, but you are giving your best, are you not? Then the complete joy of that attainment should be natural. Laugh to the max. Laugh in such a way so that you can feel that the universe within you is feeling enriched with you.
    You are the best version of yourself. You are not a dummy actor. You are original. If you try to be like someone else or imitate them you will lose your originality. Be yourself. Yes you can and you can achieve any goal if you keep your originality. Action speaks better than words.
     Always try to maintain your originality in your works. Then you will never feel insecure. Because your originality will keep you away from fear. And you will enjoy what you do. If you can help, help others. Helping others makes you feel enrich, at least you have something to give to others. If you want love, you may not get love. But if you want to give love then no one can stop you.
   If you can, you can. No one can stop you. If you can share someone's grief, it will create a sense of belonging. Which will build a strong bridge between mutual relations. And will make you more lovely. 
    So always be your original version.

                                Written By:- Uttam Agrahari

Wednesday, 4 August 2021

बेटियों का भी क्या वजूद

यह घटना ग्राम पोस्ट सेमरपहा जिला रायबरेली की है। अपने घर, अपनी ड्योणी, अपना आँगन किसको नही लुभाता। कौन चहता है कि ये सब कभी भी छूटे, शायद कोई नही लेकिन जहाँ  उद्देश्य ही केवल षड्यंत्र और अनेकों तरह से परेशान करना हो वहाँ  तो सरल व्यक्ति का टिकना असंभव हो जाता है।
  श्रीमती पार्वती जी जिनकी कि 5 बेटियाँ  हैं और कोई बेटा नही है। ये उनके संघर्ष की दास्तान है। पतिदेव सूर्यदीन गुप्ता जी का देहांत हो चुका होता है। वृद्ध माता जी को तो बस अब सिर्फ बेटियों का ही सहारा होता है।  और बार -2 आग्रह करने पर भी किसी बेटी के घर जाकर सेवा लेना उन्हे स्वीकार नही होता है। माताजी भी अपनी सभी पुत्रियों की आपसी सहमति से अपनी एक बेटी और दामाद को अपनी सेवा हे9तु रख लेती है। कुछ दिन बीतने के साथ ही अब परेशानियों का दौर सुरु हो जाता है। और आस पास के लोग तरह तरह से परेशान करना शुरू  कर देतें हैं। माता जी का मार्ग रोका जाता है, जिस रास्ते से हमेशा आना जाना होता था वो रास्ता बंद कर दिया जाता है और कारण पूछने पर पिंटू नामक व्यक्ति द्वारा अत्यंत तीव्र हमला हो जाता है। नशे मे धुत पिंटू माताजी पर लाठियों से कई वार कर देता है जिसमें कि उसका भाई देव कुमार उर्फ पूती व उसकी भाभी पूजा भी होती है। 
माताजी अपने ऊपर हुए इस एकाएक हमले से जख्मी हो जाती हैं और बेहोश हो जाती है। लेकिन अपराधी युवक पिंटू का हमला रुकता नही है अब भी वो बेसुध हुयी माताजी पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाता है। तभी एक दो युवक हिम्मत करके माताजी को उस घटनास्थल से किसी तरह निकालकर घर तक पहुंचाते हैं। घर पर माताजी को इस स्थिति में देखकर एक विलाप सुरु हो जाता है और बेटी जयश्री द्वारा निकटवर्ती हास्पिटल में माँ को भर्ती किया जाता है। तकरीबन डेढ़ दिन बाद माँ को होश आता है और इसी दरमियान माताजी की सभी बेटियां भी आ जाती हैं। और माँ को इस स्थिति में देखकर सबका धैर्य छूट जाता है। इस आक्रामक हुये हमले के पश्चात माताजी का पूरा शरीर साथ देना छोड़ देता है औेर मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार न्यूरो की ढेर सारी समस्याएं हो जाती हैं। माताजी अब पूर्ण रूप से चलने फिरनें मे असमर्थ हो जाती है और उनको आँख से दिखना भी बंद हो जाता है।
अपराधी को ज्यादा कुछ नही होता है बस लगभग 1 साल की जेल के बाद रिहा हो जाता है। लेकिन मां जी को तो पूरा जीवन ही कष्ट होता है। समय का पहिया घुमता है और पास पड़ोस की स्थिति और भी खराब हो रही होती है लड़ाई झगड़े बढ़ते ही जाते हैं। ये सब देखते हुये बस यही प्रतीत होता है कि समाज कितना गिर गया है किसी कि मात्र बेटियाँ  होने की सजा ये होती है कि बेटियों का रहना बहुत ही मुश्किल हो जाता है क्योंकि लोगों का क्या उन्हें तो किसी असहाय की जमीन पर, मकान पर कब्जा करनें के अतिरिक्त कुछ और दिखता ही नही है। और इसी के साथ एक आसाराम नामक व्यक्ति द्वारा जबरन माकान के सामने ही दुकान रख ली जाती है। इधर इस बेटी को अपनी माँ की सेवा के अतिरिक्त फुरसत ही नही होती कि कुछ वाद विवाद किया जाय। और उधर आसाराम का अतिक्रमण जारी रहता है जिसमें वो उस दुकान के क्षेत्रफल को मौका देखते हुये बढ़ाता जाता है।
इधर माँ की तबीयत हमेशा बिगड़ती ही रहती है। परन्तु सभी बच्चों की सेवा सुश्रुवा द्वारा स्थिति को सम्भालने का संघर्ष होता है। दिल्ली के प्रसिद्ध वेणु आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च जैसे अच्छे हास्पिटल से इलाज कराकर माता जी कि आंखो की ज्योति वापस लाने का एक असंभव सा प्रयास किया जाता है औेर बहुत सारी प्रार्थनाओं और डाक्टर के पूरे सहयोग से ये दुस्कर कार्य संभव हो जाता है और माताजी फिर से देख पानें में समर्थ हो जाती हैं।
परन्तु न्यूरो के अच्छे हास्पिटल से भी काफी इलाज के बाद भी कुछ सुधार नही हो पाया। माताजी अपने चोटिल शरीर के साथ पूरे आत्मशक्ति से लड़ी और लगभग 7 वर्षों के जटिल संघर्ष के बाद 90 वर्ष की उम्र में शरीर त्याग दिया।
काफी चौड़ा रास्ता होने के बाद भी रास्ते में मना करनें के बाद भी गिट्टी मौरंग डलवा दिया था और शोकाकुल परिवार को अर्थी भी निकालनें में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

Wednesday, 29 July 2020

नोएडा सेक्टर -51 में शर्मा कम्युनिकेशन मोबाइल की दुकान लूट

यह नोएडा सेक्टर 51 के एक ईमानदार दुकानदार मनोज शर्मा की दुकान के साथ वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ चोर उसकी दुकान में घुस गए और उन्होंने दुकान को लूट लिया। नोएडा में दिन पर दिन अपराध बढ़ रहा है। इस कोरोना महामारी के दौरान जहां जीवित रहना सभी के लिए कठिन है, इस तरह की लूट पीड़ित का दिल तोड़ देगी।
हमारे पास इस घटना के सीसीटीवी फुटेज हैं। 3 चोरों ने दुकान में प्रवेश किया और सीसीटीवी कैमरे को लुढ़का दिया लेकिन उनके काम सीसीटीवी कैमरे द्वारा रिकॉर्ड किए गए हैं। चोर लूट के लिए गुलाबी ऑटो का इस्तेमाल करते हैं। मैं इस फुटेज को यहाँ साझा कर रहा हूँ, अगर कोई भी इन चोरों को पकड़ता है तो कृपया मुझे सूचित करें। कृपया इस महामारी की अवधि के दौरान नकली फोन कॉल के माध्यम से हो रहे अपराध के बारे में सतर्क रहें और यदि आपको कोई संदिग्ध मिला तो कृपया पुलिस को भी सूचित करें।



हमें इन अपराधियों को पकड़ने के लिए जनता के समर्थन की आवश्यकता है और हमारा इरादा केवल आपको इस प्रकार की लूट से अवगत कराना है ताकि हर दुकानदार सतर्क हो सके और खुद को जितना हो सके उतना सुरक्षित बना सके। एक दुकान चलाने के लिए एक ईमानदार दुकानदार को बाजार में टिकने के लिए अधिकतम घंटों तक काम करना पड़ता है, लेकिन ये अपराधी लोग कुछ घंटों के भीतर किसी की गाढ़ी कमाई और सामान लूट लेते हैं। यह पीड़ित के लिए वास्तव में बहुत दर्दनाक है।
मैं दुकान के कुछ फुटेज भी साझा कर रहा हूं। जब दुकानदार द्वारा दुकान खोली गई तो दुकान में कुछ भी नहीं बचा था, दुकान खाली थी। चोरों  ने दुकान में उपलब्ध कैश, 25 रिपेयरिंग स्मार्टफ़ोन और सभी सामानों को चुरा लिया।




पहले की दुकान सामान से भरी थी और दुकान इस तरह थी। कृपया इस लिंक को हर जगह साझा करें ताकि ये चोर जल्दी से पकड़े जाएँ


Sharma communication Mobile shop robbed in Noida Sector-51

  It's really unfortunate with an honest shopkeeper Manoj Sharma's shop from Noida Sector 51.  Few thieves enter in his shop & they looted the shop. There is enormous crime was increased day by day in Noida. During this corona pandemic period where survival is tough for everyone, this kind of loot will break the victim's heart. We are having CCTV footage on this incident. 3 thieves enter in the shop & rolled out the CCTV camera but their works have been recorded by CCTV camera. Thieves use pink Auto for loot. 
I am sharing this footage here please, if anyone catches these thieves please inform me. Please be alert during this pandemic period a lot of crime happening through fake phone calls also And if you found any suspect then please inform to police as well.




We need public support to catch these criminals & our intention is only to make you aware of such kinds of loot so that every shopkeeper can be alert & make himself as much safe as he can.  To run a shop an honest shopkeeper have to work for maximum hours to sustain in the market but these criminal people loot someone hard-earned money & items within a few hours. It's really enormous painful for the victim.
I am sharing some footage of the shop as well. when the shop was opened by the shopkeeper nothing was left in the shop, the shop was empty. Thieves stole Cash, 25 repairing smartphones, & all accessories which were available in the shop.


The earlier shop was filled with accessories & shop was like this. Kindly share this link to everywhere so that these thieves will be caught quickly


Thursday, 26 March 2020

*प्रकृति का प्रकोप- कोरोना वायरस* 📝 *मेरी कलम से- उत्तम अग्रहरि*

👉🏻 *आप कैसे देखतें हैं इस महामारी को मै नही जानता लेकिन जैसे आकड़े चल रहें हैं अभी तक देख कर बहुत डर लग रहा है क्योंकि अभी तक कोई वैक्सीन निर्मित नही हो पायी है। बहुत तकलीफ होती है जब पता चलता है कि कोई अपना देशवासी भाई इस महामारी से जूझते हुए चल बसा। तकलीफ तो और भी तब होती है उसके पास उसका अपना कोई भी ना तो जीवित रहते और न ही मृत्यु उपरांत रह सकता है।*
  *ये विषाणु शरीर में प्रवेश करने के उपरांत कोशिकाओं को ही भोजन बनाकर अपनी संख्या इतनी तेजी से बढ़ा लेते है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसके सामने बहुत तुच्छ प्रतीत होती है।*
*ये महामारी आयी कहाँ से क्या हो सकता है इसका मूल कारण.. क्या ये सवाल हम खुद से सोचनें का प्रयत्न नही कर सकते क्योंकि थोड़ा सा मंथन तो जरुरी है थोड़ा सा विचार तो जरुरी है।*
*किसी और से पूछने से पूर्व स्वयं विचार करके देखते है, खुद का हृदय टटोलतें हैं।*
  *१. क्या हम अपनी प्रकृति के साथ खिलवाड़ तो नही कर रहे हैं।*
*२. इस प्रकृति ने हमारे लिए जो भोजन निर्धारित किया क्या हम वही कर रहे हैं।*
👉🏻 *इस प्रकृति ने हमेशा सबके अनुरूप सबको अपनी झोली खोलकर जीवन को सुलभ बनाया।*
👉🏻 *प्रकृति ने एक बच्चे को क्या आहार चाहिए कब तक चाहिए उसके जन्म के साथ ही व्यवस्था कर दी । मांसाहार अपना भोजन नही है ये वो चीज नही है जो हम इंसानो के लिए बनी है। बहुत समय तक प्रकृति के विरुद्ध भारी संख्या में लोग मांसाहार करते आयें हैं। जरा विचार कीजिएगा क्या कोई जीव स्वेच्छा से तैयार होता है कि आप उसे खा सकतें हैं। लेकिन नही कुछ निर्दयी लोग जबरन उसे पकड़कर काटकर खा जाते हैं।*
*"येसा नही है वो असहाय तो होते है मजबूर तो होतें है लेकिन जिस प्रकृति के आंचल में पलते हैं उस प्रकृति माँ की तरफ बहुत असहाय दृष्टि से देखतें होंगे। शायद प्रकृति माँ को भी हर बार इंसानी भूल को माफ करने का धैर्य समाप्त हो गया। सजा तो मिलेगी भरपूर मिल रही है अब तो गेहूँ के साथ घुन भी पिस रहा है।"*
*आज कोरोना जैसी महामारी से ग्रसित होकर बहुत लोग दुर्भाग्यवश मृत्यु को प्राप्त होते जा रहे हैं। यह महामारी जीवन पर भारी प्रतीत होती जा रही है। आज श्री राम चरित मानस का एक प्रसंग याद आ गया यहाँ मै कोरोना की तुलना बाली से कर सकता हूँ जिसको ब्रम्हाजी से वरदान प्राप्त था उसके सामने किसी व्यक्ति के आते ही व्यक्ति का सारा बल और तेज उसमें समाहित हो जाता था। और येसा ही हो रहा है कोरोना की चपेट में आते ही सारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का पान कोरोना वायरस कर जाता है और अपने भीषण प्रकोप से व्यक्ति को चिरनिद्रा में ले लेता है। और बाली को तो सामने से कोई परास्त कर ही नही सकता था एक तो उसका अपना ही बाहुबल काफी था दूसरे से सामने वाले की शक्ति भी उसके शरीर में प्रवेश कर जाती थी। येसी विकट परिस्थिति में श्री राम प्रभु एक वृक्ष की ओट से उसका संहार करतें हैं। आज येसा प्रतीत होता है कि हमारे सारे डाक्टर्स श्री राम प्रभु बन कर क्लीनिक में उतर आयें है और खुद को एक लिबास में पूर्णतयः छुपाकर एक एक बालीरूपी कोरोना का संहार कर रहे हैं।*
*आज नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री से प्रार्थना करते हुये इस प्रकोप को यही रोकनें की कामना करता हूँ।*
*श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट नोएडा (रजि.-1631)*

Thursday, 17 October 2019

🎊🎉🎋 *करवा चौथ विशेष*🎋🎉🎊

🎊🎉🎋 *करवा चौथ विशेष*🎋🎉🎊

    👉🏻  *करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती  है।* 

*सुहागन महिलाओं के लिए चौथ महत्वपूर्ण है। इसलिए इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख की मनोकामना भी पूर्ण हो सकती है।*

*करवा चौथ महात्म्य*

*छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणोश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए।*

*महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। वह कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है जिससे उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से करवा चौथ का महत्त्व हम सबके सामने आ जाता है।*

*महत्त्व के बाद बात आती है कि करवा चौथ की पूजा विधि क्या है? किसी भी व्रत में पूजन विधि का बहुत महत्त्व होता है। अगर सही विधि पूर्वक पूजा नहीं की जाती है तो इससे पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है।*

*चौथ की पूजन सामग्री और व्रत की विधि*   

*करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्री*

*कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन,चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे। सम्पूर्ण सामग्री को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें।* 

*व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लें तथा शृंगार भी कर लें। इस अवसर पर करवा की पूजा-आराधना कर उसके साथ शिव-पार्वती की पूजा का  विधान है क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था इसलिए शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का धार्मिक और ज्योतिष दोनों ही दृष्टि से महत्व है। व्रत के दिन प्रात: स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोल कर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें।*

*करवा चौथ पूजन विधि*

*प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें।*
*व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें।*
*व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें-*
*प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'*

*अथवा*
*ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।*

*शाम के समय, माँ पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसार पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।*
*भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित करें।*
*सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण करें। चंद्रोदय के बाद चाँद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिष्ठान खा कर व्रत खोले।*

🎊🎉🎋 *करवा चौथ प्रथम कथा*🎋🎉🎊

*बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।*
*शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।*
*सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।*
*वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।*
*उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।*
*सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।*
*एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।*
*इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है।*
*सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।*
*अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।*

👉🏻 *करवाचौथ द्वितीय कथा* 

*इस कथा का सार यह है कि शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था, परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी। उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया।*
*परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।*

*करवा चौथ तृतीय कथा* 

*एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।*
*उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ।*
*यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।*

🎊🎉🎋 *करवाचौथ चौथी कथा*🎋🎉🎊 

*एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं। उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था।*
*पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। सोने, चाँदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जो आपसी प्रेम-भाव को बढ़ाता है। पूजन करने के बाद महिलाएँ अपने सास-ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।*
*तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। प्राचीनकाल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी।*
*एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। उसने व्रत को विधिपूर्वक किया। पूरे दिन निर्जला रही। कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी।*
*भाइयों से न रहा गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया। एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो। बहन ने भोजन ग्रहण किया।*
*भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। अब वह दुःखी हो विलाप करने लगी, तभी वहाँ से रानी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुःख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुःख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला।*
*अब तू वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं।*
*सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें।*
*पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।*

*पूजा एवं चन्द्र को अर्घ्य देने का मुहूर्त*

*17 अक्टूबर के दिन चंद्रोदय का समय 20:50 मिनट पर*
*प्राचीन मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है।*

🎊🎉🎋 *श्री बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट (रजि.-1631)नोएडा*🎋🎉🎊

🎋🌿🌾 *देवी माँ का नौवां स्वरूप- सिद्धिदात्री* 🌾🌿🎋

 🌿🌿🌾 *नौवां नवरात्रा* 🌾🌿🌿 🎊🎊🎉☀ *आओ  माता* ☀🎉🎊🎊 🎋🌿🌾 *देवी माँ का नौवां स्वरूप- सिद्धिदात्री* 🌾🌿🎋         👉 *शारदीय नवरात्र...